|| Anivarya Ayurved ||

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The Book- Anivarya Ayurved
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“ || अनिवार्य आयुर्वेद || “ – ये पुस्तक है , वैध्य सुमित ठक्कर की 7 साल की आयुर्वेद चिकित्सा की सफलता और उनके रुग्णों के अनुभवों के बारे में |
जो यंहां अलग अलग छोटे छोटे किस्सों के रूप में प्रदर्शित किये गए हैं | और यंहां साथ में आयुर्वेद के कुछ महत्व के मुद्दों का भी वर्णन मिलेगा | जिससे सभी बुद्धिजनों को आयुर्वेद की अनिवार्यता का ज्ञान प्राप्त होने में सहायता मिलेगी |

Language:
Hindi
Pages:
200  Pages


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* प्रस्तावना, प्रेरणा और समर्पण *


एतदमृतं साक्षाज्जगत्यायासवर्जितम् |

                                - चरक संहिता

आयुर्वेद मृत्युलोक का ऐसा साक्षात् अमृत है जो बिना कोई महेनत किये ही प्राप्त हो शकता है |

 

ये पुस्तक है , वैध्य सुमित ठक्कर की ७ साल की आयुर्वेद चिकित्सा की सफलता और उनके रुग्णों के अनुभवों के बारे में | जो यंहां अलग अलग छोटे छोटे किस्सों के रूप में प्रदर्शित किये गए हैं |

इस ७ साल के सफर में न जाने कितने ही लोगो ने अपने जीवन में आयुर्वेद की अत्यंत अनिवार्यता को सच्चे अंत:करण से महसूस किया है | और आज के इस कलियुग में इस आयुर्वेद रूपी अमृत की अनिवार्यता का ज्ञान समाज के सभी उम्र के, सभी व्यवसाय के, सभी जाति के, सभी धर्मो के लोगो-वर्गों को हो, उसी उद्देश्य से भगवन धनवंतरी की कृपा से आज ये पुस्तक आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहा हूँ |

इस पुस्तक की संरचना के प्रणेता है, मेरे आदरणीय पूज्य स्वर्गीय गुरूजी वैध्य श्री शोभन वसाणी जी | वैसे तो उनकी वाणी से या प्रत्यक्ष रूप से मुझे उनसे ज्ञान प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला, पर इससे भी ज्यादा उनकी लिखी हुई ऐसी ही गुजराती पुस्तके पढकर बहुत मजेदार और बेहद उपयोगी ज्ञान अपने भीतर समाविष्ट कर पाया हूँ | आज उन्ही के रास्ते चलते हुए अपने चिकित्सा ज्ञान से भगवन धनवंतरी की कृपा से हजारों रुग्णों को स्वस्थ करने में मैं निमित्त बन शका हूँ | वैध्य श्री शोभन भाई कहते थे कि सभी वैध्यो को अपने अनुभव से प्राप्त हुआ ज्ञान छुपाना नहीं चाहिए वर्ना समाज आयुर्वेद रूपी अमृत से वंचित रह जायेगा |

इस पुस्तक में धीरे धीरे लगभग सभी प्रकार के मुख्य रोगों की चिकत्सा के बारे में आप जान पाएंगे और यंहां साथ में आयुर्वेद के कुछ महत्व के मुद्दों का भी वर्णन मिलेगा | कई जगह पे आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति और अन्य चिकित्सा पद्धति में में जो फर्क है उसपर भी प्रकाश डाला गया है , जिससे समाज के बुद्धिजीवी सज्जनों को सरल स्वास्थ्य प्राप्ति के पथ पर चलने के लिये योग्य दिशा प्राप्त हो पाए | सभी चिकित्सा पद्धति के डॉक्टर्स और वैद्यों को भी इसका लाभ मिलेगा |

कुछ समय पहेले || अनिवार्य आयुर्वेद || के थोड़े से आर्टिकल्स मैंने फेसबुक के विभिन्न गृप्स और गुगल+ पर पोस्ट किये थे , जिसको आप सभी सज्जनों का प्रेमपूर्ण प्रतिसाद मिलने से मैं इस संपूर्ण पुस्तक की हार्ड कॉपी आपके सामने प्रस्तुत करने के लिये उत्साहित हो पाया हूँ |

इस पुस्तक को मैं अपने पूज्य माता-पिता, मेरे आदरणीय पूज्य स्वर्गीय गुरूजी वैध्य श्री शोभन वसाणीजी, इस संसार के वर्तमान में कार्यरत और भविष्य में होने वाले तथा भूतकालमें हो चुके सभी वैध्यों के श्री चरणों में समर्पित करता हूँ |

“इस संसार के सभी प्राणियों और मनुष्यों के दीर्घायु , स्वास्थ्य और सुख की कामना करते हुए आप सभी को मेरा जय धनवंतरी के साथ प्रणाम” | चलिए आयुर्वेद की छोटी सी यात्रा का प्रारंभ करते है मित्रो !!! 

 

लेखक :

- वैध्य सुमित ठक्कर (B.A.M.S-P.G.P.P)

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