Keshav Palankashhadi Dhup Batti 5000 Sticks, Loose Pack without Label

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आयुर्वेद की प्राचीन चरक संहिता के अनुसार पलंकषा (गूगल), निम्बपत्र, वचा, कुष्ठ, हरीतकी, सर्षप, यव और गोघृत के धुप करने से ज्वर (viral fever) नाश होता है |

useful in purifying air for breath better ,useful in allergic rhinitis,balancing atmosphere for mind stable,improves immune system,destroying virus



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  केशव पलंकषादि धूपबत्ती

पलंकषा निम्बपत्र वचा कुष्ठ हरीतकी |                                                                                                               

सर्षपा: सयवा: सर्पिधुपनं ज्वरनाशनम्|| (च.चि.३/३०७)

Contents:

guggulu Commifera mukul Niryas 5.5 gm CH.S Nimpaan Azadirachta indica Leaves 5.5 gm CH.S Vacha Acorus calamus Rhizome 5.5gm CH.S Kushtha Saussurea lappa Root 5.5 gm CH.S Haritaki Terminalia chebula Fruit 5.5 gm CH.S Sarsav Brassica nigra seed 5.5 gm CH.S Jav Hordeum vulgare seed 5.5 gm CH.S Godhrut - - 18 gm AB Gomay - - 40 gm AB Kapoor

आयुर्वेद की प्राचीन चरक संहिता के अनुसार पलंकषा (गूगल), निम्बपत्र, वचा, कुष्ठ, हरीतकी, सर्षप, यव और गोघृत के धुप करने से ज्वर(viral fever) नाश होता है |  

अगरबत्ती / धूपबत्ती का इतिहास :- इस समय की अगरबत्ती / धूपबत्ती का उद्भव २०० साल से है, २०० साल के पहेले एक नजर करे तो पता चले कि सब लोग घर मे देसी गाय के घी से दीप जलाते थे, और गाय का घी, गोबर, जीवन उपयोगी लकडी से हवन करते थे, जिससे शरीर एवं वातावरण शुद्ध रहता था, बाद मे धीरे-धीरे गाय की कत्ल होने लगी और घी मिलना बन्ध हो गया या तो महंगा हो गया, हमारी श्रध्धा भगवान से कम ना हो इसलिये हमने चारकोल, chemical, artificial fragrance से बनी अगरबत्ती / धूपबत्ती हमारे घर के मंदिर तक पहुंचा दी है |

***नीचे पलंकषादि धूपबत्ती एवं सामान्य अगरबत्ती / धूपबत्ती का विवरण दिया है|

क्रम

            पलंकषादि धूपबत्ती

             सामान्य अगरबत्ती / धूपबत्ती

1.

द्रव्य:-

गो घृत, गोमय, आयुर्वेदीय औषधियों इस द्रव्य को मिला के बनती है|

द्रव्य:-

चारकोल, chemical, artificial fragrance, लकड़ी का भूसा वगेरे...द्रव्यों से बनती है|

2.

धूप करने से उत्पन्न gas:-

nitric oxide, nitrous oxide, ethylene oxide, propylene oxide, ozone, hydrogen sulfide, formaldehyde  etc…..

धूप करने से उत्पन्न gas:-

 sulfer dioxide, nitrogen oxide,carbon monoxide etc….

3.

 

उत्पन्न Nitric oxide, nitrous oxide gas उपयोगी:-

गाय के घी को जलाने से निकलता है वो श्वसन नलिका का शोथ कम करता है, अस्थमा(दम) जेसी बीमारी से दूर रखता है|

उत्पन्न sulfer dioxide, nitrogen oxide, carbon monoxide gas शरीर के लिए हानिकारक है,ज्यादा श्वास में लेने से asthma(दम), हदयरोग, cancer, brain disease जेसी व्याधि करता है|

4.

उत्पन्न ethylene oxide, propylene oxide,ozone gas उपयोगी:-

गाय के घी और आयुर्वेदीय औषधि को जलाने से निकलता है वो bacteria और virus का नाश करता है, और वातावरण की शुध्धि करता है|

dangue, chikungunya जेसी बीमारी से दूर रखता है|

उत्पन्न sulfer dioxide, nitrogen oxide, carbon monoxide gas को श्वास में लेने से COPD, skin allergy, neurological symptoms, respiratory cancer और शरीर में toxic leval बढ जाता है|

5.

उत्पन्न hydrogen sulfide, formaldehyde gas उपयोगी:-

गाय के गोबर को जलाने से निकलता है, वो bacteria और virus का नाश करते है, हदय रोग, श्वसन रोग की बीमारी से दूर रखता है, शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति बढाता है|

धुंवा श्वास में लेने से शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति कम हो जाती है, जिससे रोग होने की संभावना ज्यादा होती है|

6.

प्राकृतिक सुगंध होती है|

 

artificial सुगंध होती है|

7.

बुद्धि शक्ति, स्मरण शक्ति बढती है|

 

बुद्धि शक्ति, स्मरण शक्ति कम होती है|

8.

एक ऐसा भी research हुवा है की

10 gm देसी गाय के घी को जलाने से 1 ton जितना oxygen जमा होता है|

एक ऐसा भी research हुवा है की

सामान्य अगरबत्ती / धूपबत्ती का धुंवा cigarette के धुंवे जितना खतरनाक होता है|

9.

प्रकृति का संतुलन करता है, और वातावरण को शुध्ध करता है|

प्रकृति का असंतुलन करता है, और वातावरण को अशुध्ध करता है|

     नोंध:-पलंकषादि धूपबत्ती में कोई सुगंधी chemical न होने से कोई असामन्य सुगंध की अपेक्षा न रखें|

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