#केस ७. “ डायबिटीस, कोलेस्ट्रॉल और आयुर्वेद औषध “
‘ झायड्स केडिला और केडिला फार्मास्यूटिकल्स ‘ नाम तो सबने सुना ही होगा, देश की चौथे नंबर की सबसे बड़ी फार्मा कंपनी, जो सालाना १ बिलियन डॉलर से भी ज्यादा का बिज़नेस करती है | आज सुबह जब में न्यूज़ पेपर पढ़ रहा था तो इस कंपनी के मालिक पंकजभाई पटेल जो दवाई उध्योग के दिग्गज है उनका इंटरव्यू छपा था | पढकर दुःख और क्रोध की मिश्रित भावनाएँ मन में प्रकट हुई |
उनके कहने के मुताबिक केडिला फार्मास्युटिकल्स ने भविष्य के ‘फार्मा वोर' को ध्यान में रखते हुए भारत के मार्केट में टिके रहने के लिये १ नयी दवाई की खोज की थी जिसका नाम रखा गया ‘ लिपोग्लिन ‘ | जो २०१३ में भारत के मार्केट में लोंच की गयी | इस दवाई को बनाने के लिये कंपनी के रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम के १००० वैज्ञानिको को १३ साल जितना लंबा समय लग गया और उसके पीछे २५ करोड डॉलर यानि लगभग १५०० करोड रुपयों का खर्च भी हुआ | ‘ लिपोग्लिन ‘ की उपयोगिता : डायबिटिक रोगियो का सुगर लेवल और कोलेस्ट्रोल एक साथ कंट्रोल में रहता है | बस !
हमारा भारत चिकित्सा विज्ञान का पिता है जिसने आयुर्वेद के द्वारा लाखों सालों तक मनुष्यों और प्राणियों के स्वास्थ्य की रक्षा की है और आगे भी करता ही रहेगा | भारत जैसे देश के लिये यह बहुत ही दुःख दायक बात है कि सिर्फ़ इतनी सी दवाई खोजने में इतना सारा समय और रूपयें बर्बाद हो रहे है | एक वाक्यमें कहा जाये तो डायबिटीस यानि प्रमेह यानि खून में और मूत्र में शर्करा का होना और कोलेस्ट्रॉल यानि रक्तगत मेद यानि खून में चरबी की मात्रा का बढ़ना | ये दोनों ही तकलीफें एक व्यक्ति में एक साथ उत्पन्न हो जाने की संभावना बहुत होती ही है ये सामान्य बात है , क्योंकि प्रमेह में सप्तधातु निर्माण की प्रक्रियामें बाधा उत्पन्न होगी ही इसिलिए आयुर्वेद में पहले से ही आचार्योने ऐसे औषध योग/फोर्म्युला ही तैयार किये थे की जिस रोगी को डायबिटीस हो उसे साथमें कोलेस्ट्रोल जैसी बीमारी परेशान न कर शके | और ये आयुर्वेद औषध खोजने में आचार्योने भी बहुत सारी खोज करी थी ऐसे ही नहीं कुछ भी लिख दिया था तो फिर दोबारा से देश के इतने समय और पैसों की बर्बादी क्यों ??? ये तो वही बात हो गयी कि हिरा हमारे घर में ही पड़ा होने के बावजूद हम सिर्फ कोयलों की तलाश के लिए यंहा वंहा गड्डे खोदने में लगे है | इतनी मूर्खता को तो केवल कलियुग में ही प्रशंशा मिल सकती है मित्रो !
डायबिटीस और कोलेस्ट्रॉल दोनों को काबू में रख शके ऐसी कुछ आयुर्वेदिक औषधियों के नाम में आपको बताना चाहूँगा जिसमें से कोई एक भी अगर दी जय तो पर्याप्त है ...१. आरोग्य वर्धिनी वटी २. रसायन चूर्ण ३. कैशोर गुग्गुलू ४. चंद्रप्रभा वटी ५. वसंत कुसुमाकर रस ६. प्रमेहगज केसरी रस ...और बताऊँ या इतने काफी है ?? और ये सब औषध डायबिटीस के साथ सिर्फ़ कोलेस्ट्रोल को ही काबू में नहीं रखते बल्कि डायबिटीस की वजह से होने वाली और भी तकलीफों में सहायक होते है | इस मुद्दे से जुडा हुआ मेरा एक केस अभी याद रहा है...
रुग्ण नाम : भावनाबेन सोनी
व्यवसाय: गृहिणी
उम्र : ६० वर्ष
तारीख: ०२/०५/२०१४
केस नं. र/१२६३
पता : सेटेलाईट – अहमदाबाद, गुजरात, भारत
इस केस में मजे की बात ये है की बिना पेशन्ट को देखे ही ऐसे ही चिकित्सा की गयी थी | इनके पतिदेव के प्रोस्टेट की चिकित्सा मेरे यंहा चल रही थी और वो एक दिन मुझे दिखाने के लिये उनकी पत्नीके ब्लड रिपोर्ट्स लाए और कहने लगे की उनकी पत्नी भावनाबेन का डायबिटीस और कोलेस्ट्रॉल बहुत प्रयत्न के बाद भी काबू में नहीं आ रहा था | एलोपेथी और होमियोपैथी दोनों चिकित्सक निष्फल प्रयत्न कर चुके थे | रिपोर्ट्स इस प्रकार थे ...
खाने से पहेले का सुगर लेवल = FBS > 143 mg/dl , Urine sugar > absent
खाने के दो घंटों के बाद का सुगर लेवल = PPBS > 185 mg/dl , Urine sugar > +
खून में चरबी का प्रमाण = Serum Cholesterol > 290 mg/dl
रिपोर्ट्स बहुत ज्यादा खराब नहीं थे पर नोर्मल भी नहीं थे , मैंने कहा अगर आपकी इच्छा हो तो एलोपेथी के साथ आप कुछ आयुर्वेद औषध देकर देखिये फर्क तो पड़ेगा | ऐसे केस में एकदम से एलोपेथी औषध बंद नहीं करवाना चाहिए , क्योंकि एलोपेथी दवाइयां एक प्रकार का व्यसन ही है जिसे धीरे धीरे छुड़वाना चाहिए तो रोगी आराम से उन दवाइयोंसे मुक्त हो शके | उन्होंने कहा चलो लेकर तो देखते है |
तारीख : ०२/०५/२०१४ को १५ दीन की औषधियाँ इस प्रकार दी गयी...
१. प्रमेहगज केसरी रस – २ गोली दिन में दो बार खाने के बाद पानी के साथ
२. मामेजक घन वटी - २ गोली दिनमें दो बार खाली पेट पानी के साथ
३. चंद्रप्रभा वटी - २ गोली दिनमें दो बार खाली पेट पानी के साथ
४. कांचनार गुग्गुलु - २ गोली दिनमें दो बार खाली पेट पानी के साथ
इस केस में कोई भी सिर्फ़ १ प्रकार का औषध देना उचित इसलिए नहीं था क्योंकि उनका शरीर पहले से एलोपथी का व्यसनी बन चुका था इसलिए ४ प्रकार के औषध देने ही पड़े | आयुर्वेद के पास लोग बहोत धीरे से पंहुचते है न कि आयुर्वेद धीरे से असर करता है , ७ सालो में जितने भी केस डायबिटीस और कोलेस्ट्रॉल के आये थे उनमें से मेरे पास एक प्रातिशत भी लोग सीधे सीधे आयुर्वेद के पास नहीं आये थे | न जाने इस एलोपेथी वालो ने लोगो को कितना डराया हुआ है !!!
तारीख :१६/०५/२०१४ को वापिस आये तब दवाईसे शरीर में सकारात्मक उर्जा उत्पन्न हुयी थी इसलिए वापिस १ महीने के लिए वो ही औषधियाँ ले गए थे |
तारीख १७/०६/२०१४ को दवाई में थोडासा परिवर्तन किया था मानसिक संतोष के लिये ..
नंबर १ से ३ वाली सभी औषधियाँ वो ही थी | ४. लिपान कैप्सूल्स ( बान लेब की कोलेस्ट्रोल के लिये ) – २ केप्सूल दिनमें दो बार खाने के बाद
... १५ दिन बाद तारीख १७/०७/२०१४ को सुगर का रीपोर्ट लेकर आये थे = PPBS > 124 mg/dl & urine sugar > Nil …जो बिलकुल ही नोर्मल हो चुका था ... मुझसे बिना पूछे ही इतना रिपोर्ट करवाया था , वो तो बहुत खुश थे पर फिर भी मैंने कहा १५ दिन बाद और एक लेबोरेटरी में करवाएंगे डायबिटीस और कोलेस्ट्रॉल दोनों के लिये अच्छे से |
इसबार रिपोर्ट के हिसाब से औषधयोग में परिवर्तन किया था ... १५ दिन के औषध इस प्रकार थे...
१. महामंजिष्ठादी घन वटी – २ गोली दिन में दो बार खाली पेट - कोलेस्ट्रोल के लिये
२. मामेजक घन वटी - २ गोली दिनमें दो बार खाली पेट पानी के साथ – ब्लड सुगर कंट्रोल के लिये
... १५ दिन बाद तारीख ०३/०८/२०१४ का रिपोर्ट इस प्रकार था =
s. cholesterol > 173.8 mg/dl
PPBS > 149.9 mg/dl & urine sugar > Nil
FFBS > 107 mg/dl & urine sugar > Nil ..
दर्दी तो बहुत खुश थे काफी समय बाद कोलेस्ट्रोल का इतना अच्छा रिपोर्ट देखा था उन्होंने ...लेकिन PPBS थोडा सा बढ़ा होने के कारण १५ दिन के लिये महामंजिष्ठादी घन वटी के साथ इसबार कांचनार गुग्गुल और केराला आयुर्वेदा फार्मा की टेबलेट ग्लायमिन २ बीडी दी थी मैंने |
...ता : १८/०८/२०१४ को महामंजिष्ठादी घन वटी , कांचनार गुग्गुल और फिर से मामेजक घन वटी ( ग्लायमिन के अभाव के कारण ) ही दी थी ...फिर ३ महीने तक यही दवाई उनके हसबंड लेकर जाते थे पेशन्ट को तो मैने देखा ही नहीं था | फिर एक समय पे अचानक उनको शहर छोड़कर जाना पड़ा फिर पता नहीं क्या हुआ उनके कोलेस्ट्रोल और डायबिटीस का..शायद फिर वही एलोपेथी ही था उनका सहारा , हर जगह आसानी से उपलब्ध !!
औषध निर्माण के बहुत सारे शास्त्र आयुर्वेद शाखा में लिखे गए जब आयुर्वेद का सुवर्ण युग चल रहा था जैसे कि ... शारंगधर संहिता, भैषज्य रत्नावली, भारत भैषज्य रत्नाकर , सहस्रयोगम , रसतंत्रसार और साथ में अष्टांगसंग्रह और चरक-सुश्रुत संहिताएं तो है ही | हमारे पूर्वजो ने न जाने कितने परिश्रम , कितने प्रेक्टिकल प्रयोग और कितनी साधनाएँ कर के इनको लिखा है जो आज भी उतने ही उपयोगी सिद्ध हो रहे है , तो फिर हमें उसी दिशा में चलकर स्वास्थ्य को फेलाने में क्या समस्या है !!! मित्रो ! आयुर्वेद की अनिवार्यता को समजकर तो देखिये, आपके जीवन में स्वास्थ्य का दीपक फिर से प्रज्वलित होगा | पैसे और समय खर्च ही करने है फिरसे तो आयुर्वेद की शाखामे ज्यादा रिसर्च करवायें, जंगलो के सिवा खेतों में भी ज्यादा वनस्पतियां उगायें तो नि:संदेह आप कुछ हद तक तो मानवता का भला कर सकेंगे |