मित्रो ! कितना भी पुराना शिरदर्द हो आपको...

मित्रो ! कितना भी पुराना शिरदर्द हो आपको...

मित्रो ! कितना भी पुराना शिरदर्द हो आपको...

 - Post By 

Dr. Summet Thakkar

#रहस्य आयुर्वेद का :

- मित्रो ! कितना भी पुराना शिरदर्द हो आपको ... जो बार बार आपको परेशान करता हो और आपको तुरंत उससे हमेशां के लिये छुटकारा पाना हो और वो भी बिना दवाई के ...क्या ये शक्य है ????

जी हां बिलकुल ! पुराने ज़माने में गाँवो में ये प्रयोग कुछ लोग मशहूर होने के लिये किया करते थे, और वो भी रहस्यपूर्ण तरीके से. ...जो में आज मानवता के हित के लिये सबको बताना चाहूँगा ...

जब भी आपको शिरदर्द हो ...एक सोंठ का टुकड़ा लीजिए...एक स्वच्छ पत्थर पे थोडा सा पानी डालिए ...उसपे सोंठ के टुकड़े को घिसिये...जो भी सोंठ की घिसाई / अर्क निकले उसे पत्थर से निकाल कर अपनी  ऊँगली पे लीजिए या किसी और को कहिये अपनी उंगली पे ले..फिर जैसे काजल अपनी आँखों में लगाते है , वैसे ही उसे अपनी आँखों में लगा दीजिये...|

थोड़ी देर तक आंखोमे बहोत ही जलन होगी...पानी निकलेगा...शिर में फसे दोष आँखों से और नाक से  निकलते जायेंगे...वो जबतक निकले तब तक निकलते रहने दीजिये...
धीरे धीरे शिर बिलकुल हल्का होता जायेगा... हो सकता है बरसो पुराना शिर दर्द १ ही दिन में ठीक हो जाये | लेकिन अगर फिर दुबारा तकलीफ हो तो ये प्रयोग दुबारा भी कीजिए....जब तक बीमारी जड़ से खतम ना हो तबतक आप ये प्रयोग कर सकते है |

#सावधानी : बस आपको थोड़ी क्षणों के लिये थोड़ी तकलीफ उठानी होगी , पर अगर ज्यादा जलन हो आँखों में तो पास में शुद्ध गाय का घी रखिये...जब आप से तकलीफ सही ना जाये तब उस घी को अपनी आँखों में लगा लीजिए या फिर उस घी की ३ से ४ बुँदे अपने नाक के दोनों छिद्रों में किसीसे कहकर डलवा दीजिये..थोड़े समय में ही जलन और तकलीफ दूर हो जायेगी |

अस्तु....

लेखक :
- वैध्य सुमित ठक्कर (B.A.M.S - P.G.P.P)


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