• #पुस्तक: “ || #अनिवार्यआयुर्वेद || ” [ लेखक :- वैध्य सुमित ठक्कर (बी.ऐ.एम.एस.-पी.जी.पी.पी) ] • #केस ५. “ कमाल प्याज के रस की ६ बूंदों का “
• मित्रो ! आज में आपको एक ऐसे केस के बारे में बताने जा रहा हूँ जो इमर्जंसी अवस्था का है – जिसमे एलोपेथी एम.डी. डॉक्टर कुछ नहीं कर पाए और आयुर्वेद के एक सामान्य औषध ने रुग्ण और उसके घरवालों के दिल की धडकनों को फिर से सामान्य गति अर्पित की | केस कुछ इस तरह है .......
• करीब २ साल पहेले की बात है | रात को करीब १० बजे का समय था....तेज बारिश हो रही थी , बिजलीयाँ चमक रही थी...आसमान बहुत ही काले – घने बादलो से भरा था | लगता था आज पूरी रात बारिश थमने का नाम नहीं लेने वाली | में अभी थोड़ी देर पहेले ही क्लिनिक से लौटा था , भोजन ग्रहण करके थोडा विश्राम करने जा ही रहा था की उतने में मेरे फ्लेट के नजदीक वाले फ्लेटमें रहने वाले मेरे एक रिलेटिव का फोन कॉल बजा | में पुरे दिन की भागदौड से हुई थकावट की वजह से फोन उठाने के मुड में नहीं था , मैंने अपनी पत्नी से कह दिया तुम बात कर लो | लेकिन मेरी किस्मत में आज विश्राम नहीं लिखा था ...
• फोन पे मेरे रिलेटिव ने बताया की उनके पडोसी अचानक बेहोश होके गिर पड़े है ....मुजे तुरंत उठके घर से निकलना पड़ा | शुक्र है टोरेंट पावरवालो का की इतनी तेज बारिश में भी अहमदाबाद में कभी इलेक्ट्रिसिटी कट नहीं होती | में तेज बारिश में नाईट ट्रेक और टीशर्ट पहनके ही , छाता लेकर धीरे धीरे रोगी के घर की ओर चल रहा था...मेरे पास चेक अप के लिये न तो कोई इंस्ट्रूमेंट था और न तो इमर्जंसी अवस्था के लिये कोई औषध....मुझे अभी सोसायटी में रहते हुए शायद २ महीने ही हुए थे, और ज्यादा कोई पहचानता भी नहीं था वंहा पर मुझे | मुझे पहुँचते हुए करीब ५ मिनिट का समय लगा...
• ...वंहा जाकर देखा तो बहुत सारी भीड़ जमा थी ...आसपास वाले सभी चिंतित मुद्रा में रोगी के आसपास खड़े कुछ बाते कर रहे थे- किसीने एम्ब्युलंस को भी कोल कर दिया था | लेकिन और एक द्रश्य देखकर मुझे थोडा गुस्सा भी आया – चेक अप करने के लिये पास वाले एक अस्पताल से एम.डी. डॉक्टर को भी बुलाया गया था जो पहेले से वो बेहोश अवस्थामे पडे रोगी के पास बैठे थे और कुछ चेक अप करने का ‘नाटक’ कर रहे थे- हदय के हिस्से पे पम्पिंग कर रहे थे..नाक के पास उंगलिया रखके देख रहे थे...रोगी की उम्र होगी करीब ३५ साल...मैंने मन ही मन सोचा फिर मुझे क्यों बुलाया गया होगा, मुझे लग रहा था में फ़िज़ूल में ही यंहा पहुँच गया हूँ | लेकिन मेरा जाना सार्थक हुआ था ...बताता हूं कैसे ...
• ...एम.डी. डॉक्टर का चेक-अप और चिकित्सा तो चालू ही थी...उन्होंने बी.पी. - पल्स चेक किया...कुछ इंजेक्शन दिया...और अपने कम्पाउंडर को कुछ दवाइयां और ग्लूकोज की बोतल लेने अपने पास वाले अस्पताल भेजा | बारिश की वजह से एम्ब्युलंस को आने में देर लग रही थी, इंजेक्शन दिए हुए ७ मिनट हो गए थे ...रोगी की अवस्थामें कोई सुधार नहीं हो रहा था..उसकी मूर्छावस्था बरक़रार थी | डोकटर ऐसे दिखा रहा था जैसे कोई बहुत बड़ा संकट आया हो , जिससे वो घर वालो को डराकर ज्यादा फ़ीस ले शके | ऐसेमें मेरे रिलेटिव, रोगी की पत्नी को मेरे पास लेकर आये ...स्वाभाविक था वो बहुत ही चिंतित थी...मेरे रिलेटिव ने मेरा परिचय करवाया... और ये भी स्वाभाविक था की उनके मन में मुझे देखकर शंका उत्पन्न हो-- एक तो में आयुर्वेद का वैध्य ( ज्यादातर लोगोंमे अभी भी गलत मान्यता है की आयुर्वेद में इमर्जन्सी अवस्था के लिये कोई चिकित्सा नहीं है ) , दूसरा मेरे पास न तो कोई इंस्ट्रूमेंट था चेक-अप के लिये और ना तो कोई औषध का बेग | उन्होंने शंका से साथ मुझे पूछा की क्या आप कुछ कर शकते है इस वक्त ?? ...मैंने मुस्कुराते हुए कहा ‘ जी हाँ , मुझे सिर्फ़ आपका किचन दिखाइए ’ |
• ...फिर वो और उनके साथ कोई आदमी मुझे किचन में ले गये ....मैंने यंहा वंहा नजर घुमाई मुझे सामने एक टोकरीमें प्याज’ देवता नजर आ गये, मेरा काम अब आसान था | मैंने प्याज हाथ में लेके पास खड़े भाई को दिया और कहा इसका रस निकाल दीजिये | उन्होंने १ मिनिट में एक कटोरी में रस निकाल के मुझे दे दिया , वो कटोरी लेके हम रोगी के पास पहुँच गए ..मेरे पास वाले आदमीने एम.डी. डॉक्टर से मेरा परिचय करवाया और मैने उनसे एक प्रयोग करने की अनुमति ली ..उनके पास हाँ कहने के अलावा कोई और चारा भी नहीं था, वो अपने प्रयत्न कर चुके थे और एम्ब्युलंस के आने में अभी ५ मिनट का समय था | आसपास खड़े सभी लोग मुझे आतुरता से देखने लगे की अब ये क्या नया करेंगे...
• सबसे पहेले मैंने रोगी को जमीन से उठवा कर पलंग पे सुलाने को कहा, एक रुई का टुकड़ा मंगवाया ...फिर रोगी के शिर को हल्का सा पीछे की तरफ मोड़ा .. नाक के दोनों छिद्रों में , रुई से प्याज के रस की ३-३ बुँदे डाल दी | जैसे ही प्याज का रस शिर में और गले में पंहुचा , सबके सानन्द आश्चर्य के बीच २ ही सेकंड में रोगी ने आंखे खोली और तुरंत बैठ के खड़े हो गए | प्याज के तीक्ष्ण गुण ने , शिर में फसे कफ और वायु का आवरण तोड़ दिया था | दो मिनिट मैंने उनको बिठाया...फिर वो खुद बेडरूम से उठकर , चलकर एकदम नोर्मल तरीके से बाहर ड्रोइंग रूम में सोफे पर आकार बैठे | सब घरवालों की जान में जान आयी...आज प्याज ने फिर सबकी आँखों में आँसू ला दिए थे - खुशी के |
• ऐसे में अम्ब्युलंस की ध्वनि सुनाई दी – प्याज जैसे सबसे कह रहा था की उसके होते हुए आपने खामखाँ इस देश का पेट्रोल और अपने मन की शांति को बरबाद कर दिया | मित्रो ! आप ये उपाय हमेशां याद रखिये ...प्याज के रस के स्थान पर लहसुन का रस , सोंठ का पावडर , कटफल चूर्ण, त्रिकटु चूर्ण जैसे तीक्ष्ण गुण वाले पदार्थमें से जो भी उस समय पर मिल जाये उसका प्रयोग नस्यकर्म के लिये कर लीजिए | ये उपाय मूर्छा , सन्यास और पक्षाघात के हमले में भी आजमा सकते है – हो सकता है आप किसी का जीवन संकट में पड़ने से पूर्व ही बचा ले...|